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दक्षिण कन्नड़ जिले के मंगलूर शहर के उत्तर में एक खूबसूरत पहाड़ी इलाके में स्थित ओएनजीसी की सहायक कंपनी एमआरपीएल तकनीकी कौशलयुक्तृ एवं अत्याधुनिक रिफाइनरी है,गौरतलब है कि यह अनुसूची 'ए' में दर्ज एक केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। उच्च स्तर के स्वचालन से युक्तु होने के साथ-साथ विविध डिजाइनयुक्त रिफाइनरी में विभिन्न एपीआई प्रकार के क्रूड को प्रोसेस करने के लिए बृहत फ्लेक्जिबिलिटी दी गई है।

एमआरपीएल की डिजाइन इस तरह की गई है कि वह प्रति वर्ष 15 मीलियन मेट्रिकटन क्रूड का प्रोसेस करता है जिसके पास प्रीमियम डीजल (उच्च सीटेन) का उत्पादन करने के लिए दो हाइड्रोकैकर यूनिटें हैं । इसके अलावा,उच्च ओकटाइन के अनलेडेड पेट्रोल के उत्पादन हेतु रिफाइनरी में दो सीसीआर यूनिटें भी है।

समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को देखते हुए एमआरपीएल में रिफाइनिंग प्रोसेस तथा पर्यावरण संरक्षण उच्च मानक के है। पौधों की अन्य प्रजातियों के साथ-साथ विशेष रूप से स्थानीय वनस्पतियों को संरक्षित करते हुए एमआरपीएल ने रिफाइनरी के आसपास एक ग्रीन बेल्ट विकसित किया है।

स्‍टेट ट्रेडिंग कार्पोरेशन,मारिशश जिसके साथ एमआरपीएल का लंबे समय के लिए पेट्रोलियम उत्‍पाद आपूर्ति हेतु संविदा है उसको समय से आपूर्ति करने में एमआरपीएल सफल रहा है। वित्‍तीय वर्ष 2014-15 में 4394 करोड़ बिक्री मूल्‍य का 1084 TMT आपूर्ति के एवज में वित्‍तीय वर्ष 2015-16 के दौरान 2774 करोड़ बिक्री मूल्‍य का 1067 TMT पेट्रोलियम उत्‍पाद एसटीसी मारिशश को कंपनी ने भेजा।

इतिहास

ओएनजीसी द्वारा मार्च 2003 में अधिग्रहण करने से पहले यह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मेसर्स हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) तथा मेसर्स आईआरआईएल एण्ड एसोसिएट्स (एवी बिरला ग्रुप) द्वारा प्रवर्तित संयुक्त उद्यम ऑइल कंपनी थी। एमआरपीएल की स्थापना 1988 में की गई थी जिसकी प्रारंभिक प्रोसेसिंग क्षमता प्रतिवर्ष 3.0 मिलियन मेट्रिक टन थी। जिसे बढा़कर वर्तमान में 15 मिलियन मेट्रिक टन प्रतिवर्ष किया गया। रिफाइनरी ने 24 से 46 एपीआई ग्रैविटी वाले लाइट से भारी तथा सोर से स्वीट क्रूडों को प्रोसेस करने की क्षमता युक्त मिडिल डिस्टलेटों को बढ़ाने की दिशा में कल्पना की। 28 मार्च 2003 को ओएनजीसी ने ए.वी.बिरला की पूरी हिस्सेदारी (शेयर होल्डिंग) को अधिग्रहीत कर लिया । इसके अतिरिक्त रु.600 करोड़ की इक्विटी पूंजी लगाई। इस तरह से एमआरपीएल, ओएनजीसी का अधिकतम शेयरधारण वाली सहायक कंपनी बन गई।